World bank विश्व बैंक
विश्व बैंक एक अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्था है।
जो अल्प-विकसित और विकासशील देशों के विकास के लिए कार्य करती है तथा इनमें उत्पादन कार्यों को बढ़ावा देने हेतुऋ व तकनीकी सहायता प्रदान करता है।
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सन् 1944 में ब्रेटन वुड्स सम्मेलन में 44 देशों के मध्य हुए समझौते के फल स्वरुप विश्व बैंक की स्थापना हुई।स्थापना के समय यह निर्णय हुआ कि विश्व बैंक का अध्यक्ष हमेशा एक अमेरिकी व्यक्ति होगा। विश्व बैंक को पुनर्निर्माण और विकास के लिए अंतर्राष्ट्रीय बैंक (IBRD) नाम से भी जाना जाता हैं।
स्थापना के समय विश्व बैंक का मुख्य कार्य उन यूरोपीय देशों की अर्थव्यवस्था को पुननिर्मित करना था, जो द्वितीय विश्व युद्ध के कारण तबाह हो चुके थे । उसके बाद सदस्य देशों और संस्थाओं का सहयोग मिलने से विश्व बैंक ने अपना ध्यान लैटिन अमेरिका, अफ्रीका और एशिया मैं अपने सदस्य देशों की ओर भी केंद्रित कर लिया। जिसके फलस्वरूप 1950 से 1960 के दशक में सदस्य राष्ट्रों के बुनियादी ढांचे में काफी परिवर्तन आया। मुख्यत: बैंक 5 से 20 साल की विभिन्न विकास परियोजनाओं के लिए ऋण प्रदान करता है।
स्थापना। : 1944
संचालन। : 1946
विश्व बैंक का मुख्यालय : वाशिंगटन डीसी,संयुक्त राज्य
सदस्य राष्ट्र। : 189
अध्यक्ष। : David malpass
विश्व बैंक की पांच मुख्य सहायक संस्थाएं :-
- पुनर्निर्माण और विकास के लिए अंतर्राष्ट्रीय बैंक (IBRD)
- अंतर्राष्ट्रीय विकास संघ (IDA)
- अंतर्राष्ट्रीय वित्त निगम (IFC)
- बहुपक्षीय निवेश गारंटी एजेंसी (MIGA)
- निवेश विवादों के निपटान के लिए अंतर्राष्ट्रीय केंद्र (ICSID)
वर्तमान में विश्व बैंक के 189 सदस्य देश हैं। विश्व बैंक समूह एक अनूठी वैश्विक साझेदारी है जो दुनिया भर में गरीबी से लड़ रही है।
विश्व बैंक की सदस्यता उन सभी देशों के लिए खुली है जो विश्व बैंक के नियमों को पूरा करते हैं एवं IMF के सदस्य हैं।
संगठन और संरचना:
बैंक के संगठन में गवर्नर बोर्ड, कार्यकारी निदेशक मंडल और सलाहकार समिति, ऋण समिति और अध्यक्ष और अन्य स्टाफ सदस्य होते हैं। बैंक की सभी शक्तियां बोर्ड ऑफ गवर्नर्स में निहित हैं। जो बैंक की सर्वोच्च नीति बनाने वाली संस्था है।
विश्व बैंक के उद्देश्य :-
- वर्तमान में विश्व बैंक का मुख्य उद्देश्य विश्व में गरीबी को उन्मूलन तथा सभी अल्प विकसित व विकासशील राष्ट्रों की अर्थव्यवस्था में सुधार सुनिश्चित करना।
- प्रारंभिक उद्देश्य द्वितीय विश्वयुद्ध में ध्वस्त राष्ट्रों की अर्थव्यवस्थाओं का पुनः निर्माण तथा विकास हेतु उन राष्ट्रों में उत्पादन कार्य को बढ़ावा देने के लिए ऋण व तकनीकी सहायता प्रदान करना।
- इसका मुख्य उद्देश्य ऐसे कार्यों को प्रोत्साहित करना जिन से युद्ध ग्रस्त अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के स्थान पर शांति क़ालीन अर्थव्यवस्था की स्थापना करने में मदद मिल सकें।
- उत्पादन के लिए आवश्यक साधन भूमि, श्रम, पूंजी, साहस एवं संगठन प्रत्येक के लिए पूंजी की आवश्यकता होती है। तभी विकास संभव हो सकता है । अतः यह विश्व बैंक का दायित्व था कि वह सदस्य देशों के लिए पूंजी की उचित व्यवस्था करें ताकि उत्पादन मात्रा एवं किस्म दोनों ही श्रेष्ठ हो सके।
- पूंजी विनियोग को प्रोत्साहन देने के लिए व्यक्तिगत व संस्थागत निवेशकों को उनके ऋण के भुगतान की गारंटी प्रदान करना तथा उन्हें पिछड़े देशों में उत्पादक कार्यों में निवेश के लिए प्रोत्साहित करना।
- विश्व बैंक का एक प्रमुख उद्देश्य यह भी था कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार को विकसित किया जाये । सदस्य देशों को इस प्रकार वित्तीय सहायता एवं प्रोत्साहन प्रदान किया जाए जिससे देश के बीच बढ़ती असमानता को कम किया जाएं। तथा अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की वित्तीय सहायता इस प्रकार प्रदान की जाए जिससे देश का संतुलित विकास हो सके।
विश्व बैंक की संस्थाएं :-
1.पुनर्निर्माण और विकास के लिए अंतर्राष्ट्रीय बैंक (IBRD)
यह एक वैश्विक विकास के लिए मिलकर काम करने वाली संस्था है। इसके सदस्य देशों की संख्या 189 है। यह मध्यम एवं कम आय वाले देशों को ऋण प्रदान करता है।
2.अंतर्राष्ट्रीय विकास संघ (IDA)
यह दुनिया के सबसे गरीब तथा विकासशील देशों की सरकारों को रियायती ऋण और अनुदान प्रदान करता है। IDA विश्व बैंक समूह का सदस्य है।
3.अंतर्राष्ट्रीय वित्त निगम (IFC)
अंतर्राष्ट्रीय वित्त निगम विकासशील देशों में निजी क्षेत्र पर विशेष रूप से केंद्रित सबसे बड़ा विकास संस्थान है। जो निजी क्षेत्र के साथ मिलकर ऐसे बाजार तैयार करता हैं। जो सभी के लिए अवसर पैदा करे।
4.बहुपक्षीय निवेश गारंटी एजेंसी (MIGA)
बहुपक्षीय निवेश गारंटी एजेंसी को सन 1988 में आर्थिक विकास को बढ़ावा देने, लोगों के जीवन स्तर को उच्च बनाने तथा गरीबी को कम करने के लिए विकासशील देशों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई थी। यह निवेशकों को राजनीतिक जोखिम बीमा (गारंटी) प्रदान करके इस आदेश को पूरा करता है।
5.निवेश विवादों के निपटान के लिए अंतर्राष्ट्रीय केंद्र (ICSID)
अंतर्राष्ट्रीय निवेश विवादों के समाधान और मध्यस्थता के लिए सुविधाएं प्रदान करता है। अर्थात जब वे सहमत नहीं होते हैं तो निजी निवेशक और विदेशी देश मतभेदों को दूर करने में मदद करते हैं।
विश्व बैंक की सदस्यता :-
विश्व बैंक की सदस्यता केवल उन्हीं देशों को प्राप्त होती है, जो अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के सदस्य थे। सन् 1944 में ही जिन देशों ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की सदस्यता ग्रहण की थी वे बैंक के संस्थापक सदस्य बन गए। किसी भी नए सदस्य के लिए यह आवश्यक है की वर्तमान सदस्य देशों के तीन चौथाई सदस्यों का समर्थन प्राप्त करना होता है। किसी भी समय कोई देश एक लिखित सूचना द्वारा विश्व बैंक की सदस्यता से मुक्त हो सकता है। इसी प्रकार बैंक भी किसी सदस्य को निलंबित कर सकता है, यदि कोई राष्ट्र बैंक के नियमों का उल्लंघन करता है।
विश्व बैंक के पूंजी के स्रोत :-
विश्व बैंक की स्थापना के समय इसकी अधिकृत पूंजी 10 अरब अमरीकी डॉलर रखी गई थी। इस अधिकृत पूंजी में तीन चौथाई बहुमत द्वारा वृद्धि की जा सकती है। यह पूंजी एक-एक लाख डॉलर के लाख शेयरो में विभक्त की गई थी। बैंक के कार्यों के विस्तार को देखते हुए बैंक के साधन अपर्याप्त होने लगे। अतः सन 1958 में दिल्ली में हुई वार्षिक बैठक में निर्णय के पश्चात 1959 को बैंक की पूंजी में 8 अरब डॉलर की वृद्धि की गई अधिकांश देशों ने अपने अंशदान में दुगनी वृद्धि कर दी। प्रत्येक देश के अंशदाता का कोटा निम्न प्रकार से निर्धारित होता है
- अंशदान का 2% स्वर्ण अथवा अमेरिकी डॉलर के रूप में यह राशि बिना किसी कठिनाई के ऋण के लिए उपलब्ध हो सकती है।
- अंशदान का 18% सदस्य देश अपनी मुद्रा में दे सकता है। जिसे संबंधित देश की सहमति से प्राप्त किया जा सकता है।
- शेष 80% का बैंक के पास तभी जमा किया जाता है। जब बैंक को उसकी आवश्यकता हो साधारणतया अंशदान का यह भाग ऋण के लिए उपलब्ध नहीं होता।
विश्व बैंक के प्रमुख कार्य
ऋण प्रदान करना
सदस्य देशों के आर्थिक विकास के लिए ऋण की सुविधा प्रदान करना तथा अल्पविकसित एवं गरीब देशों को कम कीमत पर या बिना ब्याज के ऋण उपलब्ध करवाना।
तकनीकी सहायता प्रदान करना
सदस्य देशों की आर्थिक सहायता के बाद विश्व बैंक का द्वितीय महत्वपूर्ण कार्य इन देशों को तकनीकी सहायता प्रदान करना है। विश्व बैंक सदस्य देशों की विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाले तकनीकी, प्रशासकीय तथा वित्तीय कठिनाइयों को दूर करने के लिए उन्हें आवश्यक सुझाव भी प्रस्तुत करता है । सदस्य देश की परियोजनाओं की संभाव्यता की परखना और उसमें संशोधन करना।
गारंटी प्रदान करना
विश्व बैंक अपने सदस्य देशों को विशेष इकाइयों को स्थापित करने या अन्य परियोजनाओं को लागु करने हेतु ऋण के लिए गारंटी प्रदान करता है।
कोष निधि का निर्माण करना
विश्व बैंक का अपने शुद्ध आय में से प्रतिवर्ष कुछ भाग रिजर्व बैंक कोष में स्थानांतरित करता है इसके अतिरिक्त बैंक के पास एक विशेष कोष भी होता है। जिसका निर्माण एक प्रतिशत बट्टे की राशि से किया जाता है।
वित्तीय संसाधनों की प्राप्ति
विश्व बैंक अपने ऋण के कार्य के विस्तार के लिए उसे अपने वित्तीय साधनों का विस्तार करना भी अति आवश्यक है। क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में विश्व बैंक ने यह महसूस किया कपूंजी सीमितता के कारण व अल्पविकसित देशों की अधिक सहायता करने वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता कम है। इसलिए उसमें ऋण प्राप्त करने का कार्य आरंभ किया।
अंतरराष्ट्रीय व्यापार को प्रोत्साहित करना
विश्व बैंक अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के साथ मिलकर अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा देने के लिए अनेक कार्यों का क्रियान्वयन करता है। भुगतान संतुलन व व्यपार में आने वाली अनियमितता को दूर करना।
विनियोग को प्रोत्साहित करना
लोगों के जीवन स्तर को उच्च बनाने तथा गरीबी को कम करने के लिए विकासशील देशों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई थी।
प्रशिक्षण का कार्यक्रम
विश्व बैंक विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन भी करता है। बैंक विभिन्न विषय विशेषज्ञों को उनकी शोध परियोजनाओं पर वित्तीय अनुदान स्वीकृत कर ज्ञान की वृद्धि में योगदान देता है।इन शोध परिणामों को विश्व बैंक के जर्नल्स में प्रकाशित किया जाता है।
"विश्व बैंक समूह विकासशील गरीब देशों के लिए धन और ज्ञान के दुनिया के सबसे बड़े स्रोतों में से एक है। इसकी पाँच संस्थाएँ गरीबी को कम करने, साझा समृद्धि बढ़ाने और सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्धता साझा करती हैं।"
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