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International trade principles in hindi अंतर्राष्ट्रीय व्यापार सिद्धांत


अंतर्राष्ट्रीय व्यापार सिद्धांत:-
 अंतरराष्ट्रीय व्यापार के सिद्धांतों में रिकार्डो द्वारा प्रतिपादक तुलनात्मक लागत सिद्धांत सबसे प्रमुख माना गया है अंतरराष्ट्रीय व्यापार के सिद्धांतों को इन प्रश्नों का उत्तर देना होता है जैसे अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का आधार क्या है तथा किन देशों में अंतरराष्ट्रीय व्यापार संभव होता है तथा आपस में व्यापार करने वाले राष्ट्रों को क्या लाभ होते हैं और इन लाभों का वितरण कैसे किया जाए|
 अतःएडम स्मिथ के मत के अनुसार व्यापार का कारण दो देशों में वस्तुओं की उत्पादन लागत में निरपेक्ष अंतर है| डेविड रिकार्डो ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार में निरपेक्ष लागत अंतर को अपर्याप्त बताया और यह तर्क दिया कि दो देशों के बीच व्यापार का आधार सापेक्ष या तुलनात्मक लागत अंतर है इन दोनों अर्थशास्त्रियों के विचारों में यह समानता है कि दोनों उत्पादन लागत में केवल श्रम लागत ही मानते हैं|
प्रस्तुत इकाई में हम सर्व प्रथम श्रम लागत सिद्धांत के आधार पर प्रतिष्ठित अर्थशास्त्रियों एडम स्मिथ एवं रिकार्डों के सिद्धांत की व्याख्या प्रस्तुत करेंगे|


एडम स्मिथ का निरपेक्ष लागत अंतर सिद्धांत(Adam Smith's Theory of  absolute cost Advantage)
 प्रतिष्ठित सिद्धांत के प्रवर्तक एडम स्मिथ ने 18वीं शताब्दी में इंग्लैंड के औद्योगिक विकास एवं व्यापार को काफी हद तक प्रभावित किया स्मिथ ने पुरानी वाणिज्यिक विचारधारा की घोर आलोचना की तथा उनके द्वारा दर्शाए सिद्धांतों को तर्क हीन तथा अनर्थक बताया|
 स्मिथ ने श्रम विभाजन की उपयोगिता बताते हुए यह बताया कि श्रम विभाजन एवं विशिष्ट करण उद्योगों में उत्पादन लागत को प्रभावित करते हैं
 स्मिथ ने श्रम को उत्पादन का एकमात्र साधन माना है इसलिए उत्पादन में केवल श्रम पर किया गया व्यय  उत्पादन लागत कहलाता है| 
 स्मिथ के इस सिद्धांत की प्रमुख मान्यताओं में एक उत्पादन का एक ही साधन श्रम है तथा दूसरी  श्रम एक देश के भीतर पूर्णतया गतिशील होता है किंतु दो देशों के बीच बिल्कुल नहीं, स्मिथ के सिद्धांत को दो राष्ट्र तथा दो वस्तुओं की निरपेक्ष लागत को लेकर स्पष्ट किया जा सकता है|

 स्मिथ के सिद्धांत के अनुसार:-  यदि राष्ट्र A वस्तु X की 10 इकाइयों का उत्पादन  श्रम कि एक इकाई से करता है तथा राष्ट्र B वस्तु X की 20 इकाइयों का उत्पादन श्रम की एक इकाई से करता है, तथा राष्ट्रीय A वस्तु Y  की 20 इकाइयों का उत्पादन श्रम की एक इकाई से करता है और राष्ट्र B वस्तु Y की 10 इकाइयों का उत्पादन श्रम की एक इकाई से कर सकता है, तब ऐसी स्थिति में दोनों राष्ट्रीय यदि आपस में व्यापार करते हैं तो दोनों को लाभ होगा|
सारणी (i)
राष्ट्र
वस्तु X की इकाइयां
वस्तु की Y इकाइयां
श्रम इकाइयां
A
10
20
1
B
20
10
1

 यदि राष्ट्र A जो वस्तु Y की 20 इकाइयों का उत्पादन श्रम की एक इकाई से कर सकता है वह राष्ट्र B के लिए उत्पादन करने का निर्णय लें तथा उसी तरह राष्ट्र B वस्तु X का उत्पादन राष्ट्र A के लिए करें तो दोनों राष्ट्र को लाभ होता है|
 सारणी (ii)

राष्ट्र
वस्तु X की इकाइयां
वस्तु की Y इकाइयां
श्रम की इकाइयां
A
0
40
1
B
40
0
1

 इस सारणी से यह स्पष्ट होता है कि दोनों राष्ट्र दोनों वस्तुओं की अधिक इकाइयां प्राप्त कर सकते हैं यदि उसी श्रम मात्रा से आपस में व्यापार करते हैं|
 यह एक अत्यंत सरल सिद्धांत है जो व्यापार के लाभों को स्पष्ट करता है इसमें शर्त यह है कि व्यापार स्वतंत्र तथा बिना सरकारी हस्तक्षेप के हो|


रिकार्डो का तुलनात्मक लागत सिद्धांत ( Devid Ricardo's comparative cost advantage):-
 डेविड रिकार्डो ने अपनी पुस्तक "The  Principles of Political economy and taxation" मैं जो 1817 में प्रकाशित हुई में अंतरराष्ट्रीय व्यापार के शुद्ध सिद्धांत की व्याख्या प्रस्तुत की रिकार्डों का मानना था कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार निरपेक्ष लागत लाभ के बजाय तुलनात्मक लागत लाभ से प्रभावित होती है| एक देश उत्पादन के क्षेत्र में विशेष होगा जिसमें में सबसे सक्षम तथा दूसरे देशों की तुलना में कम अवसर लागत पर उत्पादित कर सकता है क्योंकि कम अवसर लागत पर उत्पादन करने से उसे उस वस्तु से तुलनात्मक लाभ प्राप्त कर सकता है
सारणी(i)

उत्पादन श्रम लागत (घंटों में)
देश
एक इकाई शराब
एक इकाई कपड़ा
पुर्तगाल
80
90
इंग्लैंड
120
100

अपने सिद्धांत को समझाने के लिए रिकॉर्ड ने दो राष्ट्र लिये  क्रमश: इंग्लैंड एवं पुर्तगाल तथा दो वस्तुएं शराब व कपड़ा लिये | रिकार्डो ने सर्वप्रथम यह बताया कि पुर्तगाल दोनों वस्तुएं शराब और कपड़ा उत्पादन में कम श्रम-लागत के कारण इंग्लैंड से अधिक लाभ की स्थिति में है जो उपरोक्त सारणी से स्पष्ट होता है क्योंकि पुर्तगाल को एक इकाई शराब बनाने में 80 घंटे लगते हैं जबकि इंग्लैंड को 120 घंटे लगते हैं इसी प्रकार कपड़े की एक इकाई उत्पादन में पुर्तगाल को 90 घंटे लगते हैं तथा इंग्लैंड को 100 घंटे लगते हैं|
 इस स्थिति को स्पष्ट करने के लिए अवसर लागत का उपयोग किया गया| अवसर लागत का अभिप्राय है कि एक वस्तु की अतिरिक्त इकाई का उत्पादित करने के लिए अन्य वस्तु की कितनी इकाइयों का त्यागना पड़ेगा
 सारणी ( ii ) मे  शराब व कपड़े की अवसर लागत इंग्लैंड व पुर्तगाल में क्या होगी ये दर्शाया गया है-

देश
शराब की अवसर लागत
कपड़े की अवसर लागत
पुर्तगाल
80/90 = 0.89
90/80 = 1.12
इंग्लैंड
120/100 = 1.20
100/120 = 0.83

 एक राष्ट्र किसी वस्तु के उत्पादन में तुलनात्मक लाभ की स्थिति में तब होगा जब उस वस्तु की अवसर लागत दूसरे राष्ट्र की तुलना में कम होगी शराब के उत्पादन में पुर्तगाल को इंग्लैंड की 1.20 श्रम इकाइयां की तुलना में केवल 0.89 श्रम इकाई लगानी पड़ती है । दूसरी ओर कपड़े के उत्पादन में इंग्लैंड को केवल 0.83 श्रमिक इकाई लगानी पड़ती है जबकि पुर्तगाल 1.12 इकाइयां लगाता है ।
 इस प्रकार पुर्तगाल को तुलनात्मक लाभ शराब के उत्पादन में हैं जबकि इंग्लैंड को यह स्थिति कपड़े के उत्पादन में प्राप्त होती है

 रिकार्डो ने यह बताया कि यदि पुर्तगाल शराब का उत्पादन करके इंग्लैंड को निर्यात करता है तथा इंग्लैंड कपड़े का उत्पादन करता है तथा पुर्तगाल को निर्यात करता है तो ऐसी स्थिति में दोनों राष्ट्र व्यापार से लाभ प्राप्त कर सकते हैं ।

तुलनात्मक लागत सिद्धांत की मान्यताएं(Assumptions of the comparative cost Advantage in hindi):-
 1. श्रम ही उत्पादन का एकमात्र साधन है, फलत: वस्तु की कीमत उस वस्तु के उत्पादन में निहित श्रम लागत को बताती है
 दो श्रम की सभी इकाइयां समरूप होती है

2. उत्पादन के साधन देश के अंदर पूर्णतया गतिशील किंतु अन्य देशों के बीच पूर्णतया गतिशील होते हैं

3. तुलनात्मक लागत सिद्धांत दो देशों तो वस्तु तथा एक श्रम साधन का अध्ययन करता है अर्थात रिकार्डो का व्यापार मॉडल 2*2*1 है ।

4. व्यापार में परिवहन लागते नहीं होती है

5. वस्तुओं की कीमतें उनकी वास्तविक श्रम लागत द्वारा निर्धारित होती है

6. वस्तु व सेवा के बाजार में पूर्ण पाई जाती है

 रिकार्डो के सिद्धांत की आलोचना (Criticism of ricardo's Theory in hindi ):-

 आधुनिक अर्थशास्त्रियों ने रिकार्डों के सिद्धांत की आलोचना करते हुए इसे अत्यधिक सरल तथा अव्यवहारिक बताया ।
 इस सिद्धांत की मुख्य आलोचनाएं निम्न हैै:
1. श्रम हीं उत्पादन का एकमात्र साधन नहीं है,  जैसे कि हमने ऊपर बताया कि रिकार्डों ने उत्पादन प्रक्रिया में केवल एक मात्र साधन श्रम को ही बताया है। वस्तुत: किसी भी वस्तु के उत्पादन में श्रम के अलावा पूंजी, भूमि तथा अन्य साधनों की आवश्यकता होती है ।
2. श्रम को समरूप बताया, यह भी गलत है क्योंकि कि दो श्रमिक अपनी कार्यकुशलता में समान नहीं होते तथा एक ही श्रमिक सभी प्रकार की वस्तुओं के उत्पादन में भी समान कार्य कुशल हो, अवास्तविक लगता है।

3. रिकार्डो में तुलनात्मक लागत-लाभ का आधार श्रम लागत के अंतर को बताया है । उत्पादन लागत में अंतर अनेक तत्वों के कारण होते हैं जिनमें श्रम तो केवल एक मात्र एक तत्व है ।

4. तकनीकी ज्ञान के बारे में रिकार्डों ने बताया कि एक देश दो वस्तुओं के उत्पादन में एक ही तकनीक का उपयोग करता है, जो कि गलत है, क्योंकि अलग-अलग वस्तुओं के उत्पादन में अलग-अलग तकनीक का प्रयोग होता है।

5. साधनों की पूर्ण गतिशीलता देश के अंदर होती है कि मान्यता भी पूर्ण के सही नहीं है क्योंकि बहुधा व्यवहारिक जीवन में देखने को मिलता है कि ऊंची परिश्रमिक का प्रलोभ भी व्यक्ति को अपना घर परिवार छोड़ने को प्रेरित नहीं कर पाता।
 साथ ही दूसरे देशों में श्रम की अगतिशीलता की मान्यता भी उचित प्रतीत नहीं होती क्योंकि भारत से ही इंजीनियर, डॉक्टर तथा अन्य विशेषज्ञ अमेरिका, यूरोप व खाड़ी देशों में जाते हैं तथा वहां भी बस जाते हैं।

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