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international trade introduction in Hindi (अंतरराष्ट्रीय व्यापार परिचय)

अंतरराष्ट्रीय व्यापार परिचय (international trade introduction in Hindi):-
 अंतरराष्ट्रीय व्यापार अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं की या क्षेत्रों के आर पार पूंजी, माल और सेवाओं का आदान-प्रदान है। अधिकांश देशों में यह है सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के महत्वपूर्ण अंश का प्रतिनिधित्व करता है। हर देश अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति में आत्मनिर्भर नहीं होता इसलिए अंतरराष्ट्रीय व्यापार की आवश्यकता उभर के आई क्योंकि विभिन्न राष्ट्रों में साधनों का वितरण भिन्न-भिन्न है। प्रत्येक देश की पर्यावरण व भौगोलिक स्थितियां, वृद्धि दर, तकनीकी क्षमताएं व प्रबंधकिये  कुशलता भी पृथक होती है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार तब से शुरू हुआ जबसे सभ्यताओं ने व्यापार करना शुरू किया था। वर्तमान समय में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का महत्व और बढ़ गया है आज बहुत से राष्ट्रों के सकल घरेलू उत्पाद का एक बड़ा हिस्सा बन गया है

 अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का महत्व एव आवश्यकताएं ( importance and necessity of international  trade in hindi )
 अंतरराष्ट्रीय व्यापार, विश्व के विभिन्न देशों की व्यापार में भागीदारी के साथ विकास के नवीन आयामों का निर्धारण करता है। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार किसी राष्ट्र के जीवन स्तर को बढ़ाने रोजगार प्रदान करने और उपभोक्ताओं को विभिन्न प्रकार के सामानों को कम कीमत पर उपलब्ध कराने एक महत्वपूर्ण कारक है । अंतरराष्ट्रीय व्यापार से दो देशों के बीच अच्छे संबंध स्थापित होते हैं तथा दोनों देश के आर्थिक विकास में भागीदारी बढ़ती है। 
 देश अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए इसलिए जाते हैं, जब घरेलू मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त किसी संसाधन का अभाव होना भी एक कारक है, इसलिए आवश्यक सामानों का आयात करके अपने घरेलू मांग की पूर्ति करते हैं, तथा घरेलू संसाधनों की उपलब्धता से उत्पादन करके अधिशेष को निर्यात कर सकते हैं। 

 आयात के मुख्य कारक (Main factors of import in hindi)
 एक राष्ट्र निम्नलिखित कारणों से वस्तुओं और सेवाओं का आयात करता है: -
  •  कीमत- यदि किसी उत्पाद या सेवा की कीमत किसी अन्य राष्ट्र से खरीदने पर कम कीमत पर प्राप्त की जा सकती है तो आयात का मुख्य कारक कीमत हो सकता है। 
  •  गुणवत्ता- अगर कोई विदेशी कंपनी किसी उत्पाद की अच्छी और बेहतर किसम दे सकता है, तो उसे आयात करना उचित निर्णय होगा उदाहरण के लिए स्कॉटलैंड अच्छी गुणवत्ता की स्कोच का उत्पादन करता है इसलिए स्कॉटलैंड से स्कोच का आयात करना अच्छा निर्णय होगा। 
  •  उपलब्धता- यदि किसी उत्पाद को घरेलू संसाधनों की कमी के कारण राष्ट्र के अंदर उत्पादित करना असंभव हो जाता है, उदाहरण के लिए भारत के पास तेल उत्पादन के संसाधन की कमी के कारण अधिकांशत दूसरे देशों से आयात करता है। 
  •  मांग- यदि किसी उत्पाद या सेवा की मांग घरेलू उत्पादन की तुलना में अधिक होती है तो वह राष्ट्र उस मांग की पूर्ति के लिए दूसरे देशों से आयात करता है। 

 आंतरिक एवं अंतर्राष्ट्रीय व्यापार (Internal and international trade in hindi):-

 जब वस्तुओं और सेवाओं का आदान-प्रदान जब देश के भीतर सीमाओं के घरेलू क्षेत्र तक सीमित हो तो उसे आंतरिक व्यापार कहा जाता है। जब वस्तुओं और सेवाओं का आदान प्रदान घरेलु  क्षेत्र से विश्व के अन्य देशों के साथ हो तो उसे अंतरराष्ट्रीय व्यापार कहते हैं। 
  •  अंतरराष्ट्रीय व्यापार अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं के आरपार पूंजी माल और सेवाओं का आदान-प्रदान है। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार इतिहास के अधिकांश भाग में मौजूद रहा है इसका आर्थिक सामाजिक राजनीतिक महत्व आज ही की सदियों में बढ़ने लगा है। 
  •  अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर औद्योगिक करण, उन्नत परिवहन, वैश्वीकरण, बहुराष्ट्रीय निगम और बाह्य स्रोतों से कार्य निष्पादन इन सभी का व्यापक प्रभाव पड़ा है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार के बिना देश सिर्फ अपनी खुद की सीमा के भीतर उत्पादित माल और सेवाओं तक सीमित रह जाएंगे। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार सिद्धांत रूप से घरेलू व्यापार से भिन्न नहीं है मुख्य अंतर यह है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार घरेलू व्यापार से महंगा है। इसका मुख्य कारण सीमा पर लगने वाला शुल्क है.
  •  घरेलू और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के बीच एक और अंतर यह है कि पूंजी और श्रम जैसे उत्पादन कार्य आमतौर पर बाहर की तुलना में देश के भीतर अधिक गतिशील होते हैं। 
  •  अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का सबसे वर्तमान कारक वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों का अंतर है विभिन्न राष्ट्रों के मध्य कीमतों का अंतर के कारण मांग तथा पूर्ति की स्थिति में अंतर है
  •  अंतरराष्ट्रीय व्यापार में वस्तुओं और सेवाओं के व्यवहार का सिद्धांत ठीक वैसा ही है जैसा आंतरिक व्यापार में है समस्त कार्य जैसे अवसर लागत उत्पादन संभावनाएं विनिमय दर निर्धारण मांग व पूर्ति सभी आर्थिक गतिविधियां समान ही प्रभाव डालती है चाहे व्यापार देश के भीतर हो या बाहें। 

 अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का लाभ (Advantage of international trade in hindi)
 सर्वव्यापी है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार लाभदायक है क्योंकि वे राष्ट्र जिनका अंतर्राष्ट्रीय व्यापार सशक्त है वह राष्ट्र समर्थ और इतने शक्तिशाली है कि विश्व की अर्थव्यवस्था को नियंत्रित कर सकते हैं अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लाभों को और अधिक बढ़ाया जा सकता है, यदि कृषि और विनिर्माण की वस्तुओं के व्यापार की बाधाओं को कम किया जाए ।
 अंतरराष्ट्रीय व्यापार के कुछ महत्वपूर्ण लाभ निम्न है:-

  •  घरेलू बाजार अंतरराष्ट्रीय उत्पादकों की गुणवत्ता व तकनीक के प्रभाव से अपने उत्पादों और गुणवत्ता में सुधार करते हैं ।

  •  अंतरराष्ट्रीय व्यापार से दूसरे देशों की तकनीकों के हस्तांतरण से उत्पादन में सुधार व लागत में मरीन कमी आती है साथ ही नए आविष्कारों को प्रोत्साहन मिलता है। 

  •  बाजारों की उपलब्धता से बिक्री लाभों में वृद्धि होती है। 

  •  अंतरराष्ट्रीय व्यापार से घरेलू बाजारों को वैश्विक बाजारों का सामना करना पड़ता है जिससे वह लागत न्यूनतम रखने का प्रयास करते हैं ताकि वह अपनी उपयोगिता को बाजार में बनाए रखें। 

  • देशों द्वारा अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में शामिल होने की एक होड़ लग गई है जिससे वैश्विक व्यापार में भागीदारी का बढ़ना, सकल घरेलू उत्पाद एवं प्रति व्यक्ति आय के बढ़ने को भी प्रकट करता है। 

  •  आंतरिक बाजारों के एकाधिकार तथा निर्भरता को कम किया जा सकता है और कम लागत वाले व विशेष उत्पादों व साधनों का प्रयोग किया जा सकता है। 

  •  दूसरे राष्ट्र से आयात और निर्यात करने से उन राष्ट्रों की रूचि और संस्कृति से परिचित हो सकते हैं। 

  •  जब देश निर्यात को बढ़ावा देता है तब रोजगार के अवसर बढ़ते हैं क्योंकि निर्यात से निवेश व विनिर्माण के अवसर बढ़ जाते हैं। 

  •  अंतरराष्ट्रीय व्यापार से दूसरे देशों के साथ संबंध अच्छे होते हैं जिससे रोजगार के अवसर भी बढ़ जाते हैं। 

  •  अंतरराष्ट्रीय व्यापार से कीमत स्थिरता बनी रहती है क्योंकि वस्तुओं व सेवाओं की पूर्ति कम होने पर उसकी उपलब्धता को बढ़ाया जा सकता है। 


 अंतरराष्ट्रीय व्यापार की हानियां ( disadvantage of international trade in hindi )

 अंतरराष्ट्रीय व्यापार की कुछ हानियां भी है जिसका उल्लेख निम्न प्रकार है:-

  •  अंतरराष्ट्रीय व्यापार के चलते कई घरेलू उद्योग आयातित वस्तु की कीमत गुणवत्ता से प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाते जिससे उनका बाजार विलुप्त हो जाता है, चीन के कई उत्पादों से विभिन्न देशों के उत्पाद प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाते क्योंकि चीन की वस्तुएं अन्य देशों के मुकाबले बहुत कम कीमत पर उपलब्ध है। 
  •  अंतरराष्ट्रीय व्यापार के चलते कई देश बहुत थोक में वस्तुओं का उत्पादन करते हैं जिनसे उनके प्राकृतिक संसाधनों का आवश्यकता से अधिक उपभोग हो जाता है। 
  •  निर्यात की अधिकता से वस्तुओं व सेवाओं की उपलब्धता घरेलू बाजार में कम हो जाती है जिससे देश के उपभोग व कल्याण में कमी आती है तथा घरेलू बाजार में वस्तुओं की कीमतें बढ़ जाती है। 
  •  कई बार घरेलू वस्तु सस्ती होने पर भी आयातित वस्तु कोई मांग अधिक होने से रोजगार के अवसर कम हो जाते हैं
  •  अंतरराष्ट्रीय व्यापार के कारण आर्थिक युद्ध को बढ़ावा मिलता है क्योंकि हर देश प्रतिस्पर्धा के कारण अपने निर्यात व्यापार के विस्तार में लगे हुए हैं। इस अंतरराष्ट्रीय व्यापार के परिणाम स्वरूप देश आपस में सैनिक व सुरक्षा हेतु आक्रमक हथियारों का भी व्यापार करते हैं। 
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