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balance of payments (BOP) भुगतान संतुलन

 
balance of payments (BOP)
भुगतान संतुलन :-

 भुगतान संतुलन किसी देश के द्वारा एक साल की अवधि में किए गए समस्त लेन-देन का संख्यिकी रूप  में विवरण प्रस्तुत करता है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के अनुसार भुगतान संतुलन दी गई समय अवधि के दौरान देश के निवासियों के बीच समस्त आर्थिक लेन-देन का क्रमबद्ध विवरण है, अर्थात एक और विदेशियों से प्राप्त किया तथा दूसरी और विदेशियों को किए गए भुगतान दोनों मदों का हिसाब किताब है। जिसमें विदेशी मुद्रा की आमद और बहिर्वाह शामिल है, यह किसी भी देश की विदेशी व्यापार की स्थिति ऋणी तथा ऋण-दाता के रूप में राष्ट्र की स्थिति मे होने वाला परिवर्तन तथा देशों की आधिकारिक सुरक्षा कोष की स्थिति को दर्शाता है। भुगतान संतुलन में तीन घटक होते हैं। वे  चालू खाता , वित्तीय खाता और पूंजी खाता हैं । चालू खाता अंतर्राष्ट्रीय व्यापार, निवेश पर शुद्ध आय और प्रत्यक्ष भुगतान को मापता है। वित्तीय खाता संपत्ति के अंतरराष्ट्रीय स्वामित्व में परिवर्तन का वर्णन करता है। पूंजी खाते में कोई अन्य वित्तीय लेनदेन शामिल होता है जो देश के आर्थिक उत्पादन को प्रभावित नहीं करता है।

  Purpose and benefits of balance of payments भुगतान संतुलन का उद्देश्य एवं लाभ :-

- परिवर्तनशील विनमय  में दर प्रणाली की स्थिरता की जांच विभिन्न देशों के बीच किए गए लेनदेन के क्रमबद्ध अभिलेखों द्वारा आसानी से की जा सकती है। 
-किसी देश का भुगतान संतुलन उसकी वित्तीय और आर्थिक स्थिति का खुलासा करता है।
- स्थिर विनिमय दर प्रणाली की स्थिरता एवं आवश्यकता की जाँच भी भुगतान संतुलन खातों की सहायता से आसानी से की जा सकती है, इन खातों से हमें यह भी पता लगता है कि एक देश की मुद्रा किस सीमा तक विदेशियों के द्वारा संचालित होती है।
- सैद्धांतिक रूप से, भुगतान संतुलन शून्य होना चाहिए, जिसका अर्थ है कि परिसंपत्तियों और देनदारियों में संतुलन होना चाहिए, लेकिन व्यवहार में, यह शायद ही कभी होता है। इस प्रकार, भुगतान संतुलन पर्यवेक्षक को बता सकता है कि क्या किसी देश में घाटा या अधिशेष है और अर्थव्यवस्था के किस हिस्से से विसंगतियां हैं।
- विकासशील अर्थव्यवस्था में भुगतान संतुलन हमें यह भी बताता है कि आर्थिक विकास के लिए विदेशियों से प्राप्त होने वाली आर्थिक सहायता पर किस सीमा तक निर्भर है। 
- भुगतान संतुलन का बयान सरकार को राजकोषीय और व्यापार नीतियों पर निर्णय लेने में मदद करता है, तथा यह दूसरे देशों के साथ एक देश के आर्थिक व्यवहार का विश्लेषण करने और उसे समझने के लिए महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करता है।

भुगतान संतुलन खाता Balance of payment account :-
जब किसी देश द्वारा अन्य देशों से किसी भी प्रकार का भुगतान प्राप्त करता है उसे प्राप्तिया  (credit) कहा जाता है, इन्हे प्राप्तियों मे दर्शाया जाता है। जबकि उस देश द्वारा अन्य देशों को किया गया भुगतानो को देनदारियों की तरफ दर्शाया जाता है भुगतान के संतुलन के तीन श्रेणियाँ हैं- चालू खाता, पूंजी खाता और वित्तीय खाता

चालू खाता Current Account :-

 चालू खाते में वस्तुओं व सेवाओं के आयात व निर्यात तथा एक तरफ़ा लेन-देन का लेखा-जोखा होता है। सेवा के आयात-निर्यात मे यात्रा, परिवहन, पर्यटन, बैंकिंग, बीमा, विदेशी विनियोगो से प्राप्त होने वाली आय व भुगतान शामिल होते है। 
एक तरफा भुगतान व  प्राप्तियों मे दूसरे राष्ट्रों से या दूसरे राष्ट्रों के व्यक्तियों से प्राप्त होने वाले उपहार, सहायता, दान तथा निजी व्यक्ति द्वारा भेजी गई राशि शामिल होती है। अर्थात पूंजी खाता किसी देश की संपत्ति के स्वामित्व में परिवर्तन से संबंधित है। 

पूंजीगत खाता Capital Account :-
                   देश के पूंजीगत खाते मे उसके सभी प्रकार के वित्तीय लेन-देन शामिल होते है, जिसमे उसके अल्पकालीन व दीर्घकालीन ऋण, निजी व सरकारी विनियोग शामिल होते है। पूंजीगत खाता ऋण व विनियोग के अंतराष्ट्रीय प्रवाह को दर्शाता है तथा पूंजीगत खाता राष्ट्रीय संपत्ति के स्वामित्व में शुद्ध परिवर्तन को भी दर्शाता है अर्थात इस से किसी देश की अन्य देश के साथ लेनदारियों  तथा देनदारियों के परिवर्तन का पता चलता है। एक वर्ष से अधिक समयावधि के पूँजीगत लेन-देन को दीर्घकालीन कहलाते है। तथा एक वर्ष से कम समय वाले लेन-देन अल्पकालीन कहते है। 

वित्तीय खाता Financial account :-
विदेशों से धन के प्रवाह की निगरानी वित्तीय खाते के माध्यम से की जाती है। 
वित्तीय खाता विदेशी संपत्ति के घरेलू स्वामित्व और घरेलू संपत्ति के विदेशी स्वामित्व में परिवर्तन को मापता है । यदि घरेलू स्वामित्व की तुलना में विदेशी स्वामित्व बढ़ता है, तो यह वित्तीय खाते में कमी पैदा करता है। इसका मतलब यह है कि देश अपनी संपत्ति को सोना , कमोडिटीज और कॉरपोरेट शेयरों की तरह बेच रहा है , क्योंकि यह तेजी से विदेशी संपत्ति हासिल कर रहा है।


Key points  प्रमुख बातें :-

  •  एक देश का भुगतान संतुलन उसके द्वारा किसी अन्य देश के साथ 1 वर्ष की अवधि में किया गये समस्त लेन-देन का क्रमवद्ध सांख्यिकीय अभिलेख है। 
  •  भुगतान संतुलन का सबसे प्रमुख योगदान एक देश की अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक स्थिति तथा लेनदेन की जानकारी देना है। 
  • भुगतान संतुलन मे हम एक देश के समस्त लेन-देन को शामिल करते है लेकिन व्यपार संतुलन मे केवल वस्तुओ के आयात निर्यात से होता है। 
  • भुगतान संतुलन की अवधरणा हमरे समक्ष किसी देश की अर्थव्यवस्था की आंतरिक स्थिति को दर्शाता है। 

Terminology शब्दावली :-

भुगतान संतुलन - एक देश का दूसरे देश के साथ एक वर्ष की अवधि मे किये गये समस्थ लेन देन का क्रमवद्ध विवरण। 
प्राप्तियां (credits) - दूसरे देशों से प्राप्त होने वाला भुगतान 
भुगतान (debits) - दूसरे देशों को किया जाने वाला भुगतान 
एक तरफा लेन देन - दूसरे देशों से और विदेशी नागरिकों से प्राप्त होने और भेजे जाने वाले उपहार 
भुगतान संतुलन मे घटा - जब विदेशी प्राप्तियों का मूल्य भुगतानों से कम होता है तो भुगतान संतुलन मे घाटा होता है। 
भुगतान संतुलन मे अतिरेक - जब विदेशी प्राप्तियों का मूल्य भुगतानों से अधिक होता है तो भुगतान संतुलन मे अतिरेक कहलाता है। 

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