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अप्रैल, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

Equilibrium of demand and supply मांग और पूर्ति में संतुलन

Equilibrium demand and supply   मांग और पूर्ति में संतुलन :-  बाजार संतुलन वह स्थिति है जब मांग एवं आपूर्ति संतुलन की स्थिति में होते हैं अर्थात मांग वक्र तथा आपूर्ति वक्र एक दूसरे को एक बिंदु पर काटते हैं।  बाजार में व्यक्ति किसी वस्तु की निश्चित मात्रा को एक निश्चित मूल्य पर ख़रीदना चाहते हैं।तथा उसी कीमत पर उतनी मात्रा कोई फार्म या व्यक्ति बेचने की इच्छा रखता हैं। तो वह कीमत बाजार कि संतुलित कीमत कहलाती है। आसान शब्दों में कहें तो बाजार संतुलन में जिस कीमत पर मांग की मात्रा और आपूर्ति की मात्रा बराबर हो जाती हैं, उसे बाजार संतुलन या बाज़ार कीमत निर्धारण कहते हैं। आइए इसे सारणिक रूप में देखते हैं - सेब की कीमत  मांग की मात्रा kg आपूर्ति की मात्रा kg ₹10 500 100 ₹20 400 200 ₹30 300 300 ₹40 200 400 ₹50 100 500 सारणी से स्पष्ट हो रहा है। कि सेब की कीमत जैसे-जैसे बढ़ रही है उसकी मांग वैसे-वैसे कम हो रही है दूसरी तरफ आपूर्ति बढ़ रही है। सारणी से हम देख पा रहे हैं कि अलग-अलग कीमत पर मांग और आपूर्ति की मा...

Law of supply आपूर्ति का नियम

           Law of demand and supply Law of supply आपूर्ति का नियम :- आपूर्ति का नियम यह प्रदर्शित करता है, कि जब अन्य सभी कारक स्थिर हो तब किसी वस्तु की कीमत और उसकी आपूर्ति के बीच सीधा संबंध होता है। यानी जब कीमत बढती है, तो उसकी आपूर्ति भी बढती है। और जब उसकी कीमत कम होती है तो उसकी आपूर्ति भी कम हो जाती है। अर्थात अलग-अलग कीमत पर विक्रेता अपने उत्पादन की अलग-अलग मात्रा की आपूर्ति करने की प्रवृत्ति रखते है। इसे आपूर्ति का नियम कहते हैं। मांग के नियम में हमने देखा की कीमत बढ़ने से उसकी मांग में कमी आ जाती है। लेकिन पूर्ति के नियम में यह बिल्कुल उल्टा है।क्योंकि मांग के नियम में सीधे उपभोक्ता होते हैं, जो कीमत बढ़ने पर मांग कम कर देते हैं, लेकिन आपूर्ति के नियम में औद्योगिक एवं व्यवसायी व्यक्ति होते हैं। जिन्हें कीमत बढ़ने पर अधिक लाभ होता है, इसलिए वह और अधिक उत्पादन करते हैं तथा अधिक आपूर्ति करते हैं। आइये हम इसे एक सारणिक रूप में समझते हैं -     कीमत ₹ आपूर्ति मात्रा kg       1...

Demand and supply-Law of demand मांग का नियम

Law of Supply and demand Law of demand  मांग का नियम :-  सामान्यतः यह देखा जाता है की किसी वस्तु की क्रय की जाने वाली मात्रा उसकी कीमत पर निर्भर होती है। ऊंची कीमत पर वस्तु की मांगी गई मात्रा कम होती है तथा कम कीमत पर मांगी गई मात्रा अधिक होती है। जबकि मांग को प्रभावित करने वाले अन्य सभी कारक स्थिर होने चाहिये। कीमत तथा मांग की मात्रा मे  विपरीत संबंध होते हैं। इसे मांग का नियम कहते हैं। जब कीमत और मांगी गई मात्रा को एक सारणी वद्ध रूप से समझते हैं तो इसे माँग अनुसूची (Demand schedule) भी कहते हैं। आइये एक साधारण उदाहरण लेते हैं -     सेब की कीमत प्रति किलो.   सेब की मांगी गयी मात्रा किलो. मे                 40             100               30             150               20             200         ...

International monetary fund ( IMF ) अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष

International monetary fund अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष : - द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जुलाई 1944 में, ब्रिटेन के वूड्स शहर समेल्लन में विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने मिलकर अंतर्राष्ट्रीय मौद्रिक व्यवस्था तथा संयोग के लिए अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की स्थापना का निर्णय लिया गया।   द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष तथा विश्व बैंक की स्थापना का निर्णय आर्थिक तथा मौद्रिक समस्या के समाधान के लिए उठाए गए सबसे महत्वपूर्ण कदम थे।  स्थपना दिसंबर सन 1945 मे हुई।  अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने 1 मार्च 1947 से कार्य प्रारंभ किया।   मुख्यालय वाशिंगटन डीसी, US मे स्थित है।   प्रारंभ में सदस्य देशों की संख्या 29 थी, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की सदस्यता कोई भी देश प्राप्त कर सकता है शर्त यह है कि वह देश मुद्रा कोष के चार्टर की सभी धाराओं के पालन करने का वचन दे, आज विश्व के लगभग सभी देश अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के सदस्य हैं।  संक्षिप्त:- गठन                    27 दिसंबर 1945 ...